परिचय: RJD की हार ने खोल दी लालू परिवार बिहार राजनीति की कलह
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के निराशाजनक परिणाम आते ही, लालू परिवार बिहार राजनीति में दशकों से चल रहा आंतरिक कलह एक विस्फोटक रूप में सामने आ गया है। RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सार्वजनिक रूप से राजनीति और परिवार दोनों से नाता तोड़ने का ऐलान करके पूरे राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है।
यह विवाद न सिर्फ लालू परिवार बिहार राजनीति में टूट को दिखाता है, बल्कि सीधे तौर पर तेजस्वी यादव के नेतृत्व, रणनीति और उनके ‘कोटरी’ (करीबी समूह) पर सवाल खड़े करता है।
रोहिणी आचार्य के ‘मारपीट’ और ‘अपमान’ के गंभीर आरोप

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और मीडिया के सामने आकर जो बयान दिए, वे बेहद सनसनीखेज हैं। उन्होंने RJD की करारी हार के लिए सीधे तौर पर तेजस्वी यादव के करीबी माने जाने वाले राज्यसभा सांसद संजय यादव और उनके सहयोगी रमीज को जिम्मेदार ठहराया।
- गंभीर दुर्व्यवहार: रोहिणी ने आरोप लगाया कि हार पर सवाल उठाने पर उन्हें अपमानित किया गया, गाली दी गई और उन्हें “चप्पल उठाकर मारा” गया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने ही उन्हें परिवार से बाहर किया है।
- राजनीति छोड़ने का ऐलान: उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह राजनीति छोड़ रही हैं और परिवार से भी नाता तोड़ रही हैं, क्योंकि संजय यादव और रमीज ने उन्हें ऐसा करने को कहा था। यह बयान दिखाता है कि लालू परिवार बिहार राजनीति में बाहरी प्रभाव कितना बढ़ गया है।
- लालू परिवार का दूसरा अलगाव: यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले, लालू प्रसाद ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को भी उनके बगावती तेवरों और निजी विवादों के चलते दल और परिवार से बेदखल कर दिया था। अब रोहिणी का यह ऐलान लालू परिवार बिहार राजनीति के भीतर गहराते संकट का दूसरा प्रमाण है।
विवादों के केंद्र में ‘संजय यादव’ और नेतृत्व पर सवाल
रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप यादव दोनों के निशाने पर एक ही व्यक्ति है: तेजस्वी यादव के रणनीतिकार संजय यादव।
- रणनीति और टिकट वितरण: बताया जाता है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण और पार्टी की चुनावी रणनीति में संजय यादव की बड़ी भूमिका थी। कई नेताओं का टिकट कटना और सीटों के चयन को लेकर विवाद इन्हीं फैसलों से जुड़ा माना जा रहा है।
- ‘जयचंद’ का टैग: तेज प्रताप यादव वर्षों से संजय यादव को ‘जयचंद’ और ‘हरियाणवी स्क्रिप्ट राइटर’ कहते रहे हैं, जो तेजस्वी यादव को अपने ही परिवार से दूर कर रहा है।
- फ्रंट सीट विवाद: रोहिणी आचार्य का गुस्सा तब भी सामने आया था, जब तेजस्वी की गाड़ी की फ्रंट सीट पर संजय यादव बैठे थे, जिसे रोहिणी ने लालू परिवार के प्रति अनादर माना था।
लालू परिवार बिहार राजनीति के भविष्य पर असर
रोहिणी आचार्य की इस ‘बगावत’ ने RJD को चुनाव परिणाम के बाद एक नए संकट में डाल दिया है।
- तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता: पार्टी के भीतर यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या तेजस्वी यादव अपनी ‘रणनीतिकार टीम’ और अपने परिवार के बीच संतुलन बनाने में विफल रहे हैं? लालू परिवार बिहार राजनीति में एकजुटता की कमी का सीधा नुकसान RJD को उठाना पड़ा है।
- NDA का हमला: BJP और JDU जैसे विरोधी दलों को लालू परिवार बिहार राजनीति पर हमला करने का नया मौका मिल गया है, जो उन्हें ‘परिवारवाद’ के मुद्दे पर और भी घेर सकते हैं।
- पार्टी की अंदरूनी खींचतान: लालू परिवार बिहार राजनीति की अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक हो चुकी है, जिससे यह स्पष्ट है कि RJD के लिए आने वाले समय में आंतरिक शांति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
निष्कर्ष: बिहार चुनाव में मिली हार के बाद लालू परिवार बिहार राजनीति में कलह अपने चरम पर है। रोहिणी आचार्य का राजनीति से अलग होना और संगीन आरोप लगाना दर्शाता है कि पार्टी और परिवार के भीतर नेतृत्व और हार की जिम्मेदारी को लेकर एक बड़ा टकराव चल रहा है, जिसका सीधा असर RJD के भविष्य पर पड़ेगा।


















