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जुबली हिल्स में AIMIM गायब, कांग्रेस और BRS के बीच कड़ा मुकाबला मुस्लिम वोटर्स बने निर्णायक फैक्टर

Telangana Chunav

AIMIM ने कांग्रेस को दिया सपोर्ट, BJP कमजोर पड़ी; कांग्रेस की उम्मीदें मुस्लिम वोट बैंक और रेवंत सरकार की योजनाओं पर टिकीं

तेलंगाना की जुबली हिल्स विधानसभा सीट पर सियासत इन दिनों गर्म है। 11 नवंबर को यहां उपचुनाव होने हैं, और यह सीट इस वक्त कांग्रेस और भारत राष्ट्र समिति (BRS) के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी है।
इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा AIMIM के मैदान से गायब होने और कांग्रेस को खुले समर्थन देने की है। जुबली हिल्स सीट पर करीब 4 लाख मतदाता हैं, जिनमें से 1.2 लाख मुस्लिम वोटर्स हैं। यही वजह है कि यह सीट राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल और सेंसिटिव सीटों में गिनी जा रही है।


AIMIM का कांग्रेस को सपोर्ट — नई राजनीतिक समीकरण की शुरुआत

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने इस बार खुद चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। बल्कि उसने कांग्रेस के उम्मीदवार वी. नवीन यादव को पूरा समर्थन दिया है।
कांग्रेस और AIMIM के नेताओं ने संयुक्त रूप से चुनाव प्रचार भी किया। AIMIM के MLA और स्थानीय मुस्लिम नेता कांग्रेस के प्रचार अभियानों में मंच साझा करते नजर आए।
इस कदम से यह साफ है कि AIMIM, BRS को हराने के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर मैदान में उतर चुकी है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि जुबली हिल्स का उपचुनाव AIMIM और कांग्रेस के रिश्तों की नई शुरुआत हो सकती है। इस गठजोड़ से कांग्रेस को मुस्लिम वोट बैंक का लगभग 80% समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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BRS की सबसे बड़ी चुनौती — सिंपैथी वोट बनाम एंटी इनकम्बेंसी

जुबली हिल्स सीट पर BRS के दिवंगत विधायक मगंती गोपीनाथ का परिवार पिछले एक दशक से मजबूत पकड़ बनाए हुए है।
गोपीनाथ के निधन के बाद उनकी पत्नी मगंती सुनीता को टिकट देकर पार्टी सहानुभूति (sympathy) वोटों पर भरोसा जता रही है।
2018 और 2023 दोनों चुनावों में BRS को यहां जबरदस्त जीत मिली थी, लेकिन अब AIMIM-कांग्रेस के गठजोड़ ने समीकरण बदल दिए हैं।

राजनीतिक विश्लेषक मुश्ताक मलिक कहते हैं,

“इस बार ऐसा लग रहा है कि चुनाव कांग्रेस नहीं, AIMIM लड़ रही है। AIMIM के नेता कांग्रेस के चिन्ह पर प्रचार कर रहे हैं। मुस्लिम इलाकों में AIMIM और कांग्रेस के संयुक्त पोस्टर लगे हैं।”

BJP मैदान में लेकिन प्रभाव सीमित

जुबली हिल्स में BJP हमेशा से कमजोर रही है। अब तक पार्टी यहां से चुनाव नहीं जीत पाई है।
इस बार केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने अपने नजदीकी कार्यकर्ता लंकला दीपक रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि स्थानीय लोगों के मुताबिक, BJP की जड़ें इस क्षेत्र में कमजोर हैं और मुकाबला सीधा कांग्रेस बनाम BRS के बीच सिमट गया है।


कांग्रेस को मिल सकते हैं तीन बड़े फायदे

स्थानीय विश्लेषकों के अनुसार कांग्रेस के पास जुबली हिल्स में जीत के तीन मजबूत कारण हैं:

  1. शहरी और शिक्षित वोटर बेस — जुबली हिल्स में 80% से ज्यादा मतदाता पढ़े-लिखे हैं, जो जाति या भावनात्मक राजनीति से ज्यादा प्रशासनिक प्रदर्शन को प्राथमिकता देते हैं।
  2. रेवंत सरकार की लोकप्रिय योजनाएंमहालक्ष्मी योजना और इंदिरम्मा हाउसिंग स्कीम जैसी योजनाओं ने कांग्रेस सरकार को मध्यम वर्ग और महिला वोटरों में मजबूत किया है।
  3. AIMIM का फुल सपोर्ट — मुस्लिम बहुल इलाकों में AIMIM के सक्रिय प्रचार से कांग्रेस को निर्णायक बढ़त मिल सकती है।

BRS और BJP की ‘साइलेंट समझदारी’?

कांग्रेस और AIMIM के गठजोड़ के बाद सियासी गलियारों में चर्चा है कि BRS और BJP के बीच अंदरूनी समझौता हुआ है।
हालांकि दोनों पार्टियों ने इसे सिरे से नकार दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो इसका नुकसान सीधे BRS को हो सकता है।
इस चुनाव के नतीजे राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे — क्योंकि अगर कांग्रेस यह सीट जीतती है, तो आने वाले विधानसभा चुनावों में तेलंगाना “कांग्रेस बनाम BJP” राज्य बन सकता है।


पृष्ठभूमि और चुनाव की अहमियत

यह सीट BRS विधायक मगंती गोपीनाथ के निधन के बाद खाली हुई थी। उन्होंने 9 साल तक लगातार जुबली हिल्स से प्रतिनिधित्व किया।
अब उनकी पत्नी मगंती सुनीता इस सीट पर पार्टी की उम्मीदवारी संभाल रही हैं।
कांग्रेस इस सीट को 11 साल बाद जीतने की कोशिश में है, जबकि BJP अपने अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रही है।


निष्कर्ष: मुस्लिम वोट बैंक से तय होगा नतीजा

जुबली हिल्स का उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि तेलंगाना के भविष्य की राजनीति का संकेत बन गया है।
1.2 लाख मुस्लिम वोटर्स जिस दिशा में वोट करेंगे, वही पार्टी जीत की दहलीज पर होगी।
कांग्रेस और AIMIM के संयुक्त अभियान से मुकाबला दिलचस्प हो गया है, जबकि BRS सहानुभूति लहर पर भरोसा कर रही है।

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