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वुमनिया’ सिंगर रेखा झा की दर्दभरी कहानी: शोहरत मिली तो पति की किडनी फेल, 10 साल इलाज चला; अब सफलता देखने को नहीं रहे

शोहरत मिली

पटना (बिहार): ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ फिल्म के मशहूर गाने ‘वुमनिया’ को गाकर पहचान बनाने वाली सिंगर रेखा झा की जिंदगी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। शोहरत और संघर्ष दोनों ने उन्हें एक साथ घेरा। जब उनका नाम चमकने लगा, उसी वक्त पति की दोनों किडनियां फेल हो गईं।

रेखा कहती हैं — “पहले मैं घर में गुनगुनाती थी, किस्मत ने मुझे वर्ल्ड लेवल तक पहुंचा दिया। लेकिन शोहरत के साथ दर्द भी आया।”

रेखा बिहार के समस्तीपुर की रहने वाली हैं। उनके पिता संगीत शिक्षक थे, लेकिन शादी के बाद रेखा की दुनिया घर-गृहस्थी में सिमट गई। पति पंकज झा, जो ट्रैवल एजेंसी चलाते थे, ने उन्हें संगीत सिखाने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में रेखा ने मना किया, लेकिन पति के हौसले ने उनकी जिंदगी बदल दी।

संगीत सीखने के बाद रेखा ने पटना में एक ऑडिशन दिया, जहां उनकी आवाज सुनकर म्यूजिक डायरेक्टर स्नेहा खानविलकर ने उन्हें ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के लिए सिलेक्ट किया। इस फिल्म के ‘वुमनिया’ गाने ने उन्हें रातों-रात पहचान दिला दी।

पर तभी किस्मत ने करवट ली — उनके पति की दोनों किडनियां फेल हो गईं। 10 साल तक इलाज चला। रेखा बताती हैं — “पति ने कहा था, गाना मत छोड़ना। गाते रहना ताकि घर चलता रहे।”

रेखा स्टेज पर मुस्कुराकर गातीं, लेकिन अंदर से टूट चुकी थीं। साल 2022 में पति की मौत हो गई। उस दिन उनके पास अर्थी तक के पैसे नहीं थे। भाई ने किसी तरह अंतिम संस्कार कराया।

पति के जाने के बाद रेखा डिप्रेशन में चली गईं। कई महीनों तक कुछ नहीं गाया। बाद में उन्होंने छोटे-छोटे कार्यक्रमों से दोबारा शुरुआत की। अब रेखा के पास संगीत सीखने वाले बच्चे आते हैं और इंस्टाग्राम पर वह अपने गानों के वीडियो पोस्ट करती हैं।

रेखा कहती हैं — “आज जब मंच पर सम्मान मिलता है, तो मन रो उठता है। अफसोस बस इतना है कि जिस इंसान ने मुझे संगीत सिखाया, वही मेरी सफलता देखने के लिए जिंदा नहीं हैं।”

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