रिपोर्ट:
उत्तर प्रदेश वैश्विक व्यापार की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। UP Global Trade News 2025 के हिस्से के रूप में, राज्य 44वें India International Trade Fair (IITF) 2025 में पार्टनर-स्टेट के रूप में शामिल हो रहा है। यह मेला 14 से 27 नवंबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा।

“लोकल से ग्लोबल” रणनीति और ODOP का जोर
UP की विशेष रणनीति “लोकल टू ग्लोबल” है, जहां राज्य के पारंपरिक और जिला-विशिष्ट उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने पेश किया जाएगा।
राज्य ने इस मेले में अपनी One District One Product (ODOP) योजना के तहत 343 स्टॉल बनाए हैं।
इन स्टॉल्स में दिखाए जाने वाले उत्पादों में शामिल हैं:
- आगरा का पेठा,
- बनारसी हस्तशिल्प,
- भदोही की कार्पेट,
- मेरठ के खेल सामान,
- कानपुर के चमड़े के सामान,
- फिरोजाबाद का ग्लासवेयर,
- सहारनपुर की लकड़ी की कलाकृतियाँ।
प्रदर्शकों की भागीदारी और स्टार्टअप्स
राज्य की ओर से 2,750 से अधिक प्रदर्शक इस मेले में शामिल होंगे।
विशेष रूप से, लगभग 150 से अधिक युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमी इस मंच का लाभ उठाएंगी, ताकि उन्हें वैश्विक खरीदारों के साथ नेटवर्किंग और व्यापारिक अवसर मिलें।
यह हिस्सेदारी न केवल राज्य की आर्थिक विविधता को दर्शाती है, बल्कि MSME और स्टार्टअप इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने का लक्ष्य भी रखती है।
वैश्विक बाजार तक पहुंच (Global Market Access)
IITF 2025 के दौरान, ODOP उत्पादों के लिए Global Market Access सेमिनार और डिजिटल शोरूम का आयोजन किया जाएगा। इन प्लेटफार्मों के ज़रिए स्थानीय उत्पादकों को विदेशी निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय ख़रीदारों से सीधे संपर्क का मौका मिलेगा।
यह कदम न केवल एक्सपोर्ट को बढ़ावा देगा, बल्कि यूपी की पहचान को एक वैश्विक ट्रेड हब के रूप में मजबूत करेगा।
आर्थिक और सामाजिक मायने
इस मेले में उत्तर प्रदेश की भागीदारी से राज्य का उद्यमिता-बेस और ग्रामीण उद्योग दोनों को नए आयाम मिलेंगे। ODOP स्टॉल्स की मदद से कारीगरों की कलाकारी, छोटे उत्पादकों की प्रतिभा और ग्रामीण उद्यमियों की क्षमता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखेगी।
इसके अलावा, स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों की भागीदारी यह संदेश देगी कि राज्य नवाचार, समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण पर ध्यान दे रहा है।
भविष्य के संभावित असर
अगर यह पहल सफल रही, तो UP की पारंपरिक और छोटे पैमाने की अर्थव्यवस्था को निर्यात-मार्केट्स में बढ़ावा मिलेगा और राज्य में निवेश को आकर्षित करने की क्षमता और बढ़ेगी। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार भागीदारों के साथ जुड़ने से स्थानीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी बेहतर होगी।

















