2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने जोरदार सफलता हासिल की है, और यह जीत बिहार चुनाव 2025 को एक राजनीतिक मोड़ बना देती है। एनडीए ने कुल 243 विधानसभा सीटों में से 202 सीटें जीत कर शानदार बहुमत बनाया है।

पार्टी-वार सीटों का वितरण
- भाजपा (BJP): एनडीए की प्रमुख पार्टी BJP ने लगभग 89 सीटें जीती हैं।
- JDU: मुख्यमंत्री नीतिश कुमार की पार्टी ने 85 सीटें हासिल की हैं।
- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) – LJP (RV): इस गठबंधन साथी ने 19 सीटें जीती हैं।
- HAMS (Hindustani Awam Morcha): अन्य NDA सहयोगी पार्टियों में HAMS ने 5 सीटें जीती हैं।
विपक्ष में, महागठबंधन को भारी झटका लगा है:
- RJD (Rashtriya Janata Dal): महागठबंधन की मुख्य पार्टी RJD सिर्फ 25 सीटें जीत पाई।
- कांग्रेस (INC): कांग्रेस ने महागठबंधन में नाकाफी प्रदर्शन किया और केवल 6 सीटें जीतीं।
- अन्य छोटे दलों को भी कुछ सीटें मिली हैं, लेकिन महागठबंधन की क्षमता काफी सीमित रही।
वोट शेयर और विश्लेषण
दिलचस्प बात यह है कि RJD ने लगभग 22.76% वोट शेयर हासिल किया — जो कि BJP और JD(U) से अधिक है — लेकिन सीटों की संख्या में यह पिछड़ गई। इस मत विभाजन से यह साफ है कि लोक वोटर आधार में RJD की पकड़ मजबूत है, मगर उसका निर्वाचन क्षेत्र (seat-wise) प्रदर्शन उतना असरदार नहीं रहा।
विश्लेषकों का मानना है कि NDA की यह “बिहार चुनाव 2025” जीत नरेंद्र मोदी-नीतीश कुमार गठबंधन की रणनीति और नेतृत्व को एक बड़ा राजनीतिक ताज देती है। BJP-JD(U) गठबंधन की यह जीत यह दिखाती है कि उन्होंने ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में अच्छा प्रदर्शन किया, और उनका वोट बैंक व्यापक रूप से फैला हुआ है।
राष्ट्रीय राजनीतिक असर
इस चुनावी जीत का न सिर्फ बिहार पर असर होगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण प्रभाव रहने की उम्मीद है। NDA-गठबंधन की मजबूत स्थिति मोदी के लिए एक बड़ी ताकत है, खासकर आने वाले समय में अन्य राज्यों और राष्ट्रीय चुनावों की रणनीति को देखते हुए।
इसके अलावा, महागठबंधन की यह हार विपक्ष के अंदर विचार-विमर्श और पुनर्गठन को मजबूर कर सकती है, क्योंकि उसने उम्मीद के मुकाबले बहुत कम सीटें हासिल की हैं। इससे भविष्य में गठबंधन-रणनीति पर बड़ा सवाल उठेगा।


















