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मध्य प्रदेश किसान आत्महत्या संकट: एक महीने में 9 किसानों ने दी जान, प्रशासन ने कर्ज को कारण मानने से किया इंकार

9 farmers

ये कहते हुए अनिल यादव की आंखें नम हो जाती हैं, गला रुंध जाता है। वह आगे कुछ कह नहीं पाते… बाकी सारी कहानी उनके आंसू बयां कर देते हैं। अनिल नर्मदापुरम जिले के मोरघाट गांव के रहने वाले हैं। वह जिस विकास की बात कर रहे हैं, वह उनका भतीजा था — जिसने 22 अक्टूबर को फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। विकास ग्रेजुएट था, लेकिन नौकरी नहीं मिलने के कारण खेती ही उसका सहारा बन गई थी। अनिल बताते हैं कि घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी विकास पर थी क्योंकि उसका एक भाई दिव्यांग है।

ऐसी दर्दभरी कहानी सिर्फ विकास की नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के कई किसानों की है। बीते एक महीने में प्रदेश के 9 किसानों ने आत्महत्या की है। इनमें 4 किसान उज्जैन जिले के, 2 खंडवा के, जबकि नर्मदापुरम, श्योपुर और मुरैना जिले से एक-एक किसान शामिल हैं। आत्महत्या की प्रमुख वजह फसल खराब होना, कर्ज का बोझ और फसल के उचित दाम न मिलना बताई जा रही है।

हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि किसानों की खुदकुशी का कारण फसल खराब होना नहीं है, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट्स कुछ और ही कहानी बयां करती हैं।

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